बिलासपुर

बिलासपुर में अवैध पैथोलैब और कलेक्शन सेंटरों पर कार्रवाई की मांग : बिना लाइसेंस संचालित सेंटरों से शहरवासियों को खतरा – एनएसयूआई

बिलासपुर/  आज एनएसयूआई प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अनिल श्रीवास्तव के नाम एक ज्ञापन सौंपकर बिलासपुर शहर में बिना लाइसेंस के संचालित पैथोलैब और कलेक्शन सेंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। रंजेश सिंह ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि शहर की जनता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। रंजेश सिंह ने बताया कि बिलासपुर में चिकित्सा विभाग और नगर निगम के बिना अनुमति के सैकड़ों पैथोलैब और कलेक्शन सेंटर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। इन सेंटरों के पास न तो निगम की मंजूरी है और न ही स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस प्राप्त है। फिर भी ये सेंटर बिना किसी रोक-टोक के काम कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों का सामना शहरवासियों को हो सकता है। इन अवैध सेंटरों में सबसे प्रमुख नाम ”  डॉ. लाल पैथोलैब” का है, जिसका संचालन बिना स्वास्थ्य विभाग के लाइसेंस के हो रहा है। रंजेश सिंह ने आरोप लगाया कि ” डॉ. लाल पैथोलैब” जैसे कई सेंटर बिलासपुर में बिना किसी वैध अनुमति के चल रहे हैं, और इन सेंटरों के कर्मचारियों द्वारा किए गए परीक्षणों और उपचार में गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है। यह नाम, जो अब शहर में एक पहचान बन चुका है, बिना मान्यता प्राप्त होने के बावजूद संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद, इन सेंटरों का संचालन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता और संरक्षण से हो सकता है, जो स्थिति को और भी गंभीर बना रहा है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर में लगभग 200 से 250 पैथोलैब और कलेक्शन सेंटर संचालित हो रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने इनमें से केवल 50 को ही लाइसेंस जारी किया है। “लाल पैथोलैब” जैसे अवैध सेंटरों का लगातार बढ़ता संचालन, शहर की जनता के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। रंजेश सिंह ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की और यह आग्रह किया कि इन सेंटरों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाए। रंजेश सिंह ने चेतावनी दी कि अगर इन अवैध सेंटरों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो एनएसयूआई को मजबूर होकर बड़ा आंदोलन करने की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से निवेदन किया कि वे इन अवैध सेंटरों का संचालन तुरंत बंद कराएं और स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी के बिना संचालित हो रहे सेंटरों पर कार्रवाई करें। रंजेश सिंह के इस कदम को छात्र संगठन और नागरिकों की ओर से व्यापक समर्थन मिल रहा है, क्योंकि यह मुद्दा न केवल छात्रों के स्वास्थ्य बल्कि आम जनता की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।अगर 7 दिवस के भीतर कारवाही नहीं होने पर उग्र आंदोलन करेंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ विभाग प्रशासन की होगी।ज्ञापन सौंपते हुए पुष्पराज साहू, करन यादव, यशोदा वारे, पंकज सोनवानी, मीत सोनवानी, अंशु गोस्वामी, गजेन्द्र यादव, अनिक तिवारी, उमेश सूर्या, कृष्णा महेश्वरी, दुर्गेश कुर्रे, दिलकुमार, सुजल सप्रे आदि  छात्रनेता उपस्थित रहे ।

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