11 साल की तासीन फातिमा ने रखे रमजान के 30 रोजे, दिखाई अद्भुत लगन,कम उम्र में इबादत के प्रति समर्पण, परिवार ने बताया—बचपन से ही रोजे रखने की आदत

बिलासपुर। रमजान शरीफ का महीना इस्लाम धर्म में बेहद पवित्र और बरकतों से भरा माना जाता है। इस दौरान रोजा रखकर इबादत करना और अपने रब को याद करना खास महत्व रखता है। खासकर गर्मी के मौसम में रोजा रखना बड़े-बुजुर्गों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन ऐसे में छोटे बच्चों का उत्साह और जज्बा प्रेरणादायक बन जाता है। इसी क्रम में बिलासपुर जिले के तालापारा क्षेत्र की रहने वाली 11 वर्षीय तासीन फातिमा ने रमजान के पूरे 30 रोजे रखकर एक मिसाल पेश की है। तासीन, सैयद गुलशेर अली और श्रीमती आयशा सिद्दीका की सुपुत्री है और स्वामी आत्मानंद लाजपत राय इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा छठवीं की छात्रा है। कम उम्र में पूरे महीने रोजा रखना आसान नहीं होता, लेकिन तासीन ने अपनी लगन और हिम्मत से यह कर दिखाया। रोजा रखने के साथ-साथ वह अपनी पढ़ाई भी नियमित रूप से करती रही। उसके इस जज्बे को देखकर परिवार और आसपास के लोग भी काफी प्रभावित हैं। तासीन की दादी श्रीमती आबदा बेगम ने बताया कि उसे बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ रोजे रखने की आदत है। परिवार के संस्कार और दुआओं का ही नतीजा है कि इतनी कम उम्र में उसने पूरे 30 रोजे मुकम्मल किए हैं। रमजान के पूरे रोजे रखने के बाद अब तासीन की ईद की खुशी भी दोगुनी हो गई है। उसकी यह उपलब्धि न केवल उसके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।